Narayaneeyam-9-SA



 

श्रीमन्नारायणीयम् – 9 ( नवमम् दशकम् )

 


 

   

ॐ श्रीकृष्णाय परब्रह्मणे नम:

अथ श्रीमन्नारायणीयम् नवमम् दशकम्

जगत्सृष्टिप्रकार वर्णनं


   Verse
   

 

9-1   

स्थितस्स कमलोद्भवस्तव हि नाभिपङ्केरुहे

कुत: स्विदिदमम्बुधावुदितमित्यनालोकयन्

तदीक्षणकुतूहलात् प्रतिदिशं विवृत्तानन-

श्चतुर्वदनतामगाद्विकसदष्टदृष्ट्यम्बुजाम्


9-1   Verse
   
9-1   Meaning
   

 

9-2   

महार्णवविघूर्णितं कमलमेव तत्केवलं

विलोक्य तदुपाश्रयं तव तनुं तु नालोकयन्

क एष कमलोदरे महति निस्सहायो ह्यहं

कुत: स्विदिदम्बुजं समजनीति चिन्तामगात्


9-2   Verse
   
9-2   Meaning
   

 

9-3   

अमुष्य हि सरोरुह: किमपि कारणं सम्भ्वे-

दिति स्म कृतनिश्चयस्स खलु नालरन्ध्राध्वना

स्वयोगबलविद्यया समवरूढवान् प्रौढधी –

स्त्वदीयमतिमोहनं न तु कलेवरं दृष्टवान्


9-3   Verse
   
9-3   Meaning
   

 

9-4   

तत: सकलनालिकाविवरमार्गगो मार्गयन्

प्रयस्य शतवत्सरं किमपि नैव संदृष्टवान्

निवृत्य कमलोदरे सुखनिषण्ण एकाग्रधी:

समाधिबलमादधे भवदनुग्रहैकाग्रही


9-4   Verse
   
9-4   Meaning
   

 

9-5   

शतेन परिवत्सरैर्दृढसमाधिबन्धोल्लसत्-

प्रबोधविशदीकृत: स खलु पद्मिनीसम्भव:

अदृष्टचरमद्भुतं तव हि रूपमन्तर्दृशा

व्यचष्ट परितुष्टधीर्भुजगभोगभागाश्रयम्


9-5   Verse
   
9-5   Meaning
   

 

9-6   

किरीटमुकुटोल्लसत्कटकहारकेयूरयुङ्-

मणिस्फुरितमेखलं सुपरिवीतपीताम्बरम्

कलायकुसुमप्रभं गलतलोल्लसत्कौस्तुभं

वपुस्तदयि भावये कमलजन्मे दर्शितम्


9-6   Verse
   
9-6   Meaning
   

 

9-7   

श्रुतिप्रकरदर्शितप्रचुरवैभव श्रीपते

हरे जय जय प्रभो पदमुपैषि दिष्ट्या दृशो:

कुरुष्व धियमाशु मे भुवननिर्मितौ कर्मठा-

मिति द्रुहिणवर्णितस्वगुणबंहिमा पाहि माम्


9-7   Verse
   
9-7   Meaning
   

 

9-8   

लभस्व भुवनत्रयीरचनदक्षतामक्षतां

गृहाण मदनुग्रहं कुरु तपश्च भूयो विधे

भवत्वखिलसाधनी मयि च भक्तिरत्युत्कटे-

त्युदीर्य गिरमादधा मुदितचेतसं वेधसम्


9-8   Verse
   
9-8   Meaning
   

 

9-9   

शतं कृततपास्तत: स खलु दिव्यसंवत्सरा-

नवाप्य च तपोबलं मतिबलं च पूर्वाधिकम्

उदीक्ष्य किल कम्पितं पयसि पङ्कजं वायुना

भवद्बलविजृम्भित: पवनपाथसी पीतवान्


9-9   Verse
   
9-9   Meaning
   

 

9-10   

तवैव कृपया पुनस्सरसिजेन तेनैव स:

प्रकल्प्य भुवनत्रयीं प्रववृते प्रजानिर्मितौ

तथाविधकृपाभरो गुरुमरुत्पुराधीश्वर

त्वमाशु परिपाहि मां गुरुदयोक्षितैरीक्षितै:


9-10   Verse
   
9-10   Meaning
   

 

   

ॐ तत्सत् इति श्रीमन्नारायणीये नवमम् दशकम् समाप्तम्

श्री हरये नमः रमा रमण गोविन्द गोविन्दा

सर्वम् श्री कृष्णार्पणमस्तु


   Verse
   

 

   Verses 9-1 to 9-10
   

 

   Meaning 9-1 to 9-10
   

 


 

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