Narayaneeyam-10-SA



 

श्रीमन्नारायणीयम् – 10 ( दशमम् दशकम् )

 


 

   

ॐ श्रीकृष्णाय परब्रह्मणे नम:

अथ श्रीमन्नारायणीयम् दशमम् दशकम्

सृष्टिभेदवर्णनम्


   Verse
   

 

10-1   

वैकुण्ठ वर्धितबलोऽथ भवत्प्रसादा-

दम्भोजयोनिरसृजत् किल जीवदेहान्

स्थास्नूनि भूरुहमयानि तथा तिरश्चां

जातिं मनुष्यनिवहानपि देवभेदान्


10-1   Verse
   
10-1   Meaning
   

 

10-2   

मिथ्याग्रहास्मिमतिरागविकोपभीति-

रज्ञानवृत्तिमिति पञ्चविधां स सृष्ट्वा

उद्दामतामसपदार्थविधानदून –

स्तेने त्वदीयचरणस्मरणं विशुद्ध्यै


10-2   Verse
   
10-2   Meaning
   

 

10-3   

तावत् ससर्ज मनसा सनकं सनन्दं

भूय: सनातनमुनिं च सनत्कुमारम्

ते सृष्टिकर्मणि तु तेन नियुज्यमाना-

स्त्वत्पादभक्तिरसिका जगृहुर्न वाणीम्


10-3   Verse
   
10-3   Meaning
   

 

10-4   

तावत् प्रकोपमुदितं प्रतिरुन्धतोऽस्य

भ्रूमध्यतोऽजनि मृडो भवदेकदेश:

नामानि मे कुरु पदानि च हा विरिञ्चे-

त्यादौ रुरोद किल तेन स रुद्रनामा


10-4   Verse
   
10-4   Meaning
   

 

10-5   

एकादशाह्वयतया च विभिन्नरूपं

रुद्रं विधाय दयिता वनिताश्च दत्वा

तावन्त्यदत्त च पदानि भवत्प्रणुन्न:

प्राह प्रजाविरचनाय च सादरं तम्


10-5   Verse
   
10-5   Meaning
   

 

10-6   

रुद्राभिसृष्टभयदाकृतिरुद्रसंघ-

सम्पूर्यमाणभुवनत्रयभीतचेता:

मा मा प्रजा: सृज तपश्चर मङ्गलाये-

त्याचष्ट तं कमलभूर्भवदीरितात्मा


10-6   Verse
   
10-6   Meaning
   

 

10-7   

तस्याथ सर्गरसिकस्य मरीचिरत्रि-

स्तत्राङिगरा: क्रतुमुनि: पुलह: पुलस्त्य:

अङ्गादजायत भृगुश्च वसिष्ठदक्षौ

श्रीनारदश्च भगवन् भवदंघ्रिदास:


10-7   Verse
   
10-7   Meaning
   

 

10-8   

धर्मादिकानभिसृजन्नथ कर्दमं च

वाणीं विधाय विधिरङ्गजसंकुलोऽभूत्

त्वद्बोधितैस्सनकदक्षमुखैस्तनूजै-

रुद्बोधितश्च विरराम तमो विमुञ्चन्


10-8   Verse
   
10-8   Meaning
   

 

10-9   

वेदान् पुराणनिवहानपि सर्वविद्या:

कुर्वन् निजाननगणाच्चतुराननोऽसौ

पुत्रेषु तेषु विनिधाय स सर्गवृद्धि-

मप्राप्नुवंस्तव पदाम्बुजमाश्रितोभूत्


10-9   Verse
   
10-9   Meaning
   

 

10-10   

जानन्नुपायमथ देहमजो विभज्य

स्रीपुंसभावमभजन्मनुतद्वधूभ्याम्

ताभ्यां च मानुषकुलानि विवर्धयंस्त्वं

गोविन्द मारुतपुरेश निरुन्धि रोगान्


10-10   Verse
   
10-10   Meaning
   

 

   

अथ श्रीमन्नारायणीये दशमम् दशकम् समाप्तम्

श्री हरये नमः रमा रमण गोविन्द गोविन्दा

श्री कृष्णार्पणमस्तु


   Verse
   

 

   Verses 10-1 to 10-10
   

 

   Meaning 10-1 to 10-10
   

 


 

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