Narayaneeyam-12-SA



 

श्रीमन्नारायणीयम् – 12 ( द्वादशम् दशकम् )

 


 

   

ॐ श्रीकृष्णाय परब्रह्मणे नम:

अथ श्रीमन्नारायणीयम् द्वादशम् दशकम्

वराहावतार वर्णनम्

भूमि युद्धरण वर्णनम् च


   Verse
   

 

12-1   

स्वायम्भुवो मनुरथो जनसर्गशीलो

दृष्ट्वा महीमसमये सलिले निमग्नाम्

स्रष्टारमाप शरणं भवदङ्घ्रिसेवा-

तुष्टाशयं मुनिजनै: सह सत्यलोके


12-1   Verse
   

 

12-2   

कष्टं प्रजा: सृजति मय्यवनिर्निमग्ना

स्थानं सरोजभव कल्पय तत् प्रजानाम्

इत्येवमेष कथितो मनुना स्वयंभू: –

रम्भोरुहाक्ष तव पादयुगं व्यचिन्तीत्


12-2   Verse
   

 

12-3   

हा हा विभो जलमहं न्यपिबं पुरस्ता-

दद्यापि मज्जति मही किमहं करोमि

इत्थं त्वदङ्घ्रियुगलं शरणं यतोऽस्य

नासापुटात् समभव: शिशुकोलरूपी


12-3   Verse
   

 

12-4   

अङ्गुष्ठमात्रवपुरुत्पतित: पुरस्तात्

भोयोऽथ कुम्भिसदृश: समजृम्भथास्त्वम्

अभ्रे तथाविधमुदीक्ष्य भवन्तमुच्चै –

र्विस्मेरतां विधिरगात् सह सूनुभि: स्वै:


12-4   Verse
   

 

12-5   

कोऽसावचिन्त्यमहिमा किटिरुत्थितो मे

नासापुटात् किमु भवेदजितस्य माया

इत्थं विचिन्तयति धातरि शैलमात्र:

सद्यो भवन् किल जगर्जिथ घोरघोरम्


12-5   Verse
   

 

12-6   

तं ते निनादमुपकर्ण्य जनस्तप:स्था:

सत्यस्थिताश्च मुनयो नुनुवुर्भवन्तम्

तत्स्तोत्रहर्षुलमना: परिणद्य भूय-

स्तोयाशयं विपुलमूर्तिरवातरस्त्वम्


12-6   Verse
   

 

12-7   

ऊर्ध्वप्रसारिपरिधूम्रविधूतरोमा

प्रोत्क्षिप्तवालधिरवाङ्मुखघोरघोण:

तूर्णप्रदीर्णजलद: परिघूर्णदक्ष्णा

स्तोतृन् मुनीन् शिशिरयन्नवतेरिथ त्वम्


12-7   Verse
   

 

12-8   

अन्तर्जलं तदनुसंकुलनक्रचक्रं

भ्राम्यत्तिमिङ्गिलकुलं कलुषोर्मिमालम्

आविश्य भीषणरवेण रसातलस्था –

नाकम्पयन् वसुमतीमगवेषयस्त्वम्


12-8   Verse
   

 

12-9   

दृष्ट्वाऽथ दैत्यहतकेन रसातलान्ते

संवेशितां झटिति कूटकिटिर्विभो त्वम्

आपातुकानविगणय्य सुरारिखेटान्

दंष्ट्राङ्कुरेण वसुधामदधा: सलीलम्


12-9   Verse
   

 

12-10   

अभ्युद्धरन्नथ धरां दशनाग्रलग्न

मुस्ताङ्कुराङ्कित इवाधिकपीवरात्मा

उद्धूतघोरसलिलाज्जलधेरुदञ्चन्

क्रीडावराहवपुरीश्वर पाहि रोगात्


12-10   Verse
   

 

   

ॐ तत्सत् इति श्रीमन्नारायणीये द्वादशम् दशकम् समाप्तम्

श्री हरये नमः रमा रमण गोविन्द गोविन्दा

श्री कृष्णार्पणमस्तु


   Verse
   

 

   Verses 12-1 to 12-10
   

 


 

Please leave your valuable suggestions and feedback here